Tuesday, May 29, 2007

क्यूं कहते हो.......

क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता
कोई सह लेता है कोई कह लेता है
क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता

आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता
क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता

कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता

2 comments:

San said...

hi sonal u r return basik theory of life realy impressive

Prashant said...

Har Ek Chehray Ko Zakhmon Ka Aaina Na Keho
Yeh Zindagi To Hai Rehmat Issay Saza Na Kaho
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Na Jaanay Koi Koun Si Majbooriyon Ka Qaidi Ho
Who Saath chhod Gaya Hai To usse Bewafa Na Keho

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Yeh Aur Baat K Dushman Hua Hai Aaj Magar
Who Mera Dost Tha Kal Tak Ussay Bura Na Keho
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Humaray Aaib Humein Ungliyon Pay Ginwa do
Par Humari Peet K Peechay Humain Bura Na Keho
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.........PRASHANT PANDEY.........